रंगरशिया
चुनाव के मौसम आते ही लोगो के मूल समस्याओं की जगह ऐसे हाई-टेक मुद्दे ले लेते है कि मानो जैसे ये हाई-टेक मुद्दे हमारे मूल समस्याओं से ज्यादा जरुरी हो ।
आज महगाई-बेरोजगारी की जगह धर्म-जातीगत मुद्दो को इस तरह जबरदस्ती लाया जा रहा हो मानो ये सब्जी में पड़ने वाले नमक हो जिसके बिना जायका न आये ।
और पता नहीं आज के शासकों का विजन क्या है ये देश को विश्वगुरु बनाते बनाते ऐसी दलदल में ले जा रहे है जहाँ से शायद हमें पुनः उभरने में कई दशक न लग जाये ।
अब भारत को इन दल के दलदलों से ईश्वर ही बचायें क्योंकि सेवक शासक हो गया , चौकिदार हो गया चोर और चुनाव आते ही नाचे सभी रंगरसियों बनके मोर 🦚।
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